Sunday, January 5, 2020

उ. प्र. सामाजिक न्याय समिति, 2018 तथा ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ का उप-वर्गीकरण

जून 2018 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछड़ों के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और नौकरियों में उनकी भागीदारी के अध्ययन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय ‘सामाजिक न्याय समिति’ का गठन किया था।  बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भूपेंद्र विक्रम सिंह, रिटायर्ड आई.ए.एस. जे पी विश्वकर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक राजभर समिति के अन्य सदस्य थे।

समिति ने दिसम्बर 2018 में अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौप दी हैं| विभिन्न समाचार पत्रों में इस सम्बन्ध में छपी खबरों के अनुसार समिति ने ‘अन्य पिछड़े वर्ग’ के 27 प्रतिशत आरक्षण को तीन भागों में बांटने की सिफारिश की है। ये तीन भाग पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा के रूप में होंगे। पिछड़ा को 7 प्रतिशत,  अति पिछड़ा को 11 प्रतिशत और सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग को 9 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की गई है।

अखबारों में छपी खबरों के अनुसार पिछड़ा में यादव, अहीर, कुर्मीसोनार और चौरसिया आदि जातियां शामिल हैं| अति पिछड़ा वर्ग में गिरी, गुर्जर, गोंसाई, लोध, कुशवाहा, कुम्हार, माली, लोहार आदि तथा सर्वाधिक पिछड़ा में मल्लाह, केवट, निषाद, गद्दी, घोसी, राजभर जैसी जातियां हैं|

सन्दर्भ-


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